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रायपुर : वीडियो कॉन्फ्रेसिंग: राज्य सरकार तक सीधे पहुंच रही जनता की आवाज

Trending Puzzle : What will come in place of a question mark?

जनशिकायतों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से करने वाला छत्तीसगढ़ पहला और अकेला राज्य
सभी 27 जिलों के कलेक्टर कार्यालयों में जनता के लिए की गई व्यवस्था

रायपुर, 10 फरवरी 2015

आम जनता की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तीन जिलों से शुरू की गई वीडियो कॉन्फ्रेंसिग प्रणाली  का विस्तार अब राज्य के सभी 27 जिलों में हो चुका है। जनशिकायत निवारण विभाग के अधिकारियों ने आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला और इकलौता राज्य है, जहां सूचना टेक्नॉलाजी की इस आधुनिक प्रणाली के जरिये जनता के दुख-दर्द को सुनने और आवेदकों को राहत पहुंचाने का यह सिलसिला विगत दस वर्षों से लगातार चल रहा है। जनता की आवाज सरकार तक सीधे पहुंच रही है और एक तरह से ‘फास्ट-ट्रेक कोर्ट’ की तर्ज पर लोगों की दिक्कतों को हल किया जा रहा है। शुरूआती दौर में बस्तर (जगदलपुर), सरगुजा और बिलासपुर जिलों को इसमें शामिल किया गया था। इन्हें मिलाकर वर्ष 2008 तक 16 जिलों को इसमें जोड़ा गया। वर्ष 2012 में नौ नये जिलों के गठन के बाद अब सभी 27 जिले राज्य सरकार के वीडियो कान्फ्रेसिंग नेटवर्क से जुड़ चुके हैं, जहां कलेक्टर के कार्यालय में जनता के लिए भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देशों के अनुरूप जनशिकायत निवारण विभाग द्वारा मंत्रालय के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एन.आई.सी.) स्थित वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में प्रत्येक शासकीय कार्य दिवस में पूर्वान्ह 11.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक जिलों से सम्पर्क कर जन शिकायतों की सुनवाई की जा रही है। प्रतिदिन आठ जिलों से सम्पर्क किया जाता है। इसके लिए जिलेवार दिन और समय निर्धारित किए गए हैं। मुख्यमंत्री के यह स्पष्ट निर्देश है कि आवेदक का प्रकरण यदि मंत्रालय के किसी प्रशासकीय विभाग से संबंधित है, तो वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में उस विभाग के सचिव स्वयं अथवा उनकी अनुपस्थिति में उनके अधीनस्थ वरिष्ठ अधिकारी स्वयं उपस्थित होकर आवेदक के दुःख दर्द को समझें और निराकरण की कार्रवाई करें। शिकायत अगर जिला स्तर की है तो उस जिले के संबंधित कार्यालय प्रमुख को वहां कलेक्टोरेट के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में बुलवाया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार इस प्रणाली में अत्यंत जटिल और संवेदनशील शिकायतों की जिलेवार सुनवाई की जा रही है। हर साल करीब दो हजार प्रकरणों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में हो रही है। आवेदकों को इसके लिए राजधानी रायपुर आने की जरूरत नहीं होती, वे अपने जिले के कलेक्टर कार्यालय स्थित कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में आकर वहां से मंत्रालय (महानदी भवन) के जनशिकायत निवारण विभाग के अधिकारियों से आमने-सामने बात करके अपनी समस्या रख सकते हैं। इस दौरान वहां शिकायतों से संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों को भी बुलाया जाता है। कई बार कलेक्टर स्वयं उपस्थित होते हैं। इस प्रणाली में अब तक बड़ी संख्या में आवेदकों की समस्याओं का निराकरण हो चुका है। आदिवासी बहुल सरगुजा जिले के अम्बिकापुर निवासी परिवहन विभाग के सेवानिवृत्त वाहन चालक श्री वशिष्ट नारायण सिंह के वेतन की बकाया राशि और उनके पेंशन प्रकरण का निराकरण लम्बे समय से नहीं हो रहा था। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिये मंत्रालय के अधिकारियों से सम्पर्क कर अपनी समस्या रखी। उनके मामले का निराकरण निर्धारित समय सीमा में कर दिया गया। जशपुर जिले के ही ग्राम पोंगरो (तहसील कांसाबेल) की श्रीमती तरसिला लोहार ने जशपुर कलेक्टोरेट के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में आकर मंत्रालय के अधिकारियों को बताया कि कुछ लोगों ने उनसे मारपीट कर उन्हें जान से मारने की धमकी दी है लेकिन आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मंत्रालय (महानदी भवन)  से जशपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देशों का पालन करते हुए जशपुर पुलिस ने आरोपियों को विभिन्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों ने बताया कि सरगुजा जिले के ही ग्राम करौली (विकासखंड-लुण्ड्रा ) के टोंगनीपारा में पेयजल के लिए हैंडपम्प की जरूरत लम्बे समय से महसूस की जा रही थी। उस मोहल्ले के ग्रामीणों की समस्या को कॉन्फ्रेसिंग के जरिये सुलझा लिया गया। बस्तर जिले के ग्राम झारउमरगांव (विकासखंड-बकावण्ड़) के श्री सोमारू राम को निःशक्त होने के कारण सामाजिक सहायता पेंशन की पात्रता है, लेकिन उन्हें यह पेंशन नियमित रूप से नहीं मिल रही थी। वे जगदलपुर कलेक्टोरेट के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में उपस्थित हुए। उन्होंने अपनी बात वहां से सीधे मंत्रालय के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में बैठे अधिकारियों तक पहुंचायी। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक को उधर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में तलब किया गया और उन्हें आवेदक के पेंशन भुगतान के लिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मुंगेली जिले के ग्राम बांवली निवासी श्रीमती रेणुका पाण्डेय की यह शिकायत थी कि अतिवृष्टि से उनके मकान को नुकसान पहुंचा है, लेकिन अधिकारी उन्हें मुआवजा नहीं दे रहे हैं। इस पर मंत्रालय के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष से मुंगेली जिले के पथरिया के तहसीलदार को निर्देश दिए गए कि पात्रता को ध्यान में रखकर श्रीमती रेणुका पाण्डेय को मुआवजा दिया जाए। तहसीलदार ने उन्हें राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के अनुसार तीन हजार 800 रूपए का चेक प्रदान कर दिया।
जनशिकायत निवारण विभाग के अधिकारियों ने यह भी बताया कि मुंगेली जिले के ही श्री पंचराम वर्मा को पटवारी द्वारा भू-अभिलेखों की नकल नहीं दिए जाने की शिकायत का निराकरण भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में किया गया। बालोद जिले के ग्राम देवगहन निवासी कुमारी प्रणीता पाण्डेय की ट्रेक्टर से दबने के कारण 24 दिसम्बर 2014 को मृत्यु हो गई थी, उनके पालक को नियमानुसार शासन से मुआवजा राशि की पात्रता थी, लेकिन वह राशि उन्हें नहीं मिल पा रही थी। इस पर तत्काल गुण्डरदेही के अनुविभागीय राजस्व को निर्देश दिए गए और उन्होंने प्रणीता के पालक श्री वीरेन्द्र कुमार साहू को 25 हजार रूपए की सहायता राशि का भुगतान कर दिया। कोरिया जिले के भरतपुर स्थित शासकीय कन्या हायर सेकेण्डरी स्कूल की बालिकाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत भी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग में आयी थी। इस पर मंत्रालय के जनशिकायत निवारण कक्ष में मौजूद अधिकारियों ने भरतपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पी.एच.ई.) के अधिकारियों को पन्द्रह दिनों की समय सीमा में शौचालय की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए। निर्देशों के परिपालन में वहां के स्कूल में बालिकाओं के लिए शौचालय की सुविधा विकसित की जा चुकी है। जशपुर जिले के वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कक्ष में ग्राम भुरसा (तहसील-कुनकुरी) की कुमारी सिलबिना तिग्गा ने उपस्थित होकर जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में हो रही कठिनाई की जानकारी दी। इस पर संबंधित तहसील से उन्हें अस्थायी जाति प्रमाण पत्र तत्काल जारी करवाया गया।

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