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सिविल अस्पताल खरसिया का बुरा हाल

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खरसिया। सिविल अस्पताल खरसिया का हो गया बुरा हाल हो गया है। सर्वसुविधा युक्त अस्पताल होने के बाद भी जहां महिलाओं की डिलवरी (जचकी) नहीं हो पा रही है वहीं सामान्य मरीजो एवं एक्सीडंेटल मरीजो को प्राथमिक उपचार के लिये भी भटकना पड रहा है जिस वजह से आम आदमी को भारी मुश्किलो का सामना करना पड रहा है।
जिला भाजपा के उपाध्यक्ष श्रीचंद रावलानी जिला किसान मोर्चा अध्यक्ष गिरधारी गबेल भाजयुमो अध्यक्ष मनोज राठौर द्वारा अपने संयुक्त बयान मे आज पत्रकारो को जानकारी देते हुए बताया कि खरसिया सिविल अस्पताल मे छ.ग. षासन स्वास्थ्य विभाग द्वारा भारी सुविधाएं प्रदान की गई है। अस्पताल में न ही स्टाफ कमी है और न ही दवाईयो की कमी है, और न ही स्थान की कमी है। उसके बावजूद राजनिति का अखाडा बन गये इस अस्पताल में मरीजो के आसु न तो डाक्टरगण पोछ पा रहे है, और न ही आला अधिकारीगण जिसके कारण अस्पताल गंभीर स्थिति से गुजर रहा है।
भाजपा नेताओं ने खरसिया अस्पताल की चिन्ता करते हुये जिलाध्यक्ष रायगढ एवं स्वास्थ्य मंत्री की अजय चंद्राकार एवं प्रभारी मंत्री श्री रामसेवक पैकरा को पत्र लिखकर खरसिया अस्पताल के बारे मे समुचित जानकारी दी गई एवं मांग की गई है, इसे ध्यान देकर स्थिति मे सुधार कर अस्पताल की बुरी स्थिति को ठीक किया जाना चाहिए। पत्र मे प्रमुख अस्पताल की अनियमितओ पर प्रशासन एवं षासन का ध्यान आकर्षित कराया गया है वे इस प्रकार है।
सिविल अस्पताल में डाक्टर्स एवं स्टाफ क्वार्टर शासन द्वारा बनाये गये हैं  जिसे प्रभारी द्वारा कांगजो में आवंटित कर दिया गया है परंतु 11 क्वार्टरो में से एक भी क्वार्टर में न तो डाक्टर्स निवास करते है और न ही स्टाफ निवास करते है।  जिन डाक्टरों का एवं स्टाफ का क्वार्टर आवंटित है वे रायगढ एवं अन्य स्थानों से डेली अपडाउन करते है।  जिसका लाभ मरीजो को प्राप्त नहीं हो रहा है।  सभी वन क्लास डाक्टर अपना अपना निजी नर्सिंग होम चलाते है।  अस्पताल के समय में भी अस्पताल नहीं आते।  प्रभारी द्वारा उन पर या जिला अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं किया जाता है। खरसिया की सभी निशुल्क सुविधाओं वाला वाहन 108, 102, 104 खराब हालत में है।  सभी वाहनो को या तो जानबूझकर खराब कर दिया गया है या स्थानीय वाहनमालिकों को लाभ दिलाने का कार्य किया जा रहा है।  वह समझ से परे है।  इसी तरह अस्पताल के समय एकमात्र डाकटर जिसकी डयुटी रहती है वह डाक्टर भी अस्पताल में नहीं रहता है।  कोई इमरजेंसी आ गई तो बुलाने पर कई घंटो के बाद उपस्थित होते है।  जिससे मरीज के परिजनों एवं मरीज को भारी दिक्कतों का सामना करना पडता है।  पिछले दिनांे घघरा की एक महिला को जचकी के लिये खरसिया अस्पताल रात्रि एक बजे लाई गई जिसे रात्रि में ही रायगढ जिला अस्पताल रिफर कर दिया गया था एवं दुसरे दिन जिला अस्पताल में डयुटीरत डाक्टरो की लापरवाही के कारण उक्त महिला की मृत्यु हो गई।  परंतु खरसिया अस्पताल को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा राजनीति का अखाडा बना दिया है जिसके कारण जिला प्रशासन को दो डाक्टरों को निशाना बनाकर खरसिया अस्पताल से हटा दिया गया लेकिन उन डाकटरों के स्थान पर आज तक उनकी भरपाई नहीं हुई है।  इस कारण खरसिया अस्पताल में में वर्षो से चली आ रही महिलाओं की जचकी की व्यवस्था महिला डाक्टर के नहीं रहने से घ्वस्त हो गई है।
आज सामान्य जचकी बहुत कम हो गई है।  सीजर जचकी ही अधिकांश होती है।  जिसके कारण खरसिया प्रायः जचकी कार्य बंद हो गया है।  सभी महिलाओं को रायगढ रेफर किया जा रहा है या प्रायवेट अस्पतालों में भेजा जाता है जहां एक जचकी का चार्ज 30 हजार रूपये लिया जाता है।  जो सामान्य आदमी के लिये बहुत ही ज्यादा है।  खरसिया अस्पताल में एक महिला वन क्लास डाक्टर जो आपरेशन कर जचकी करवा सके उसकी नितांत आवश्यकता है।  क्योंकि खरसिया अस्पताल सिर्फ खरसिया का ही नहीं वरण आस पास के क्षेत्र जैसे डभरा, मालखरौदा, छाल, जोबी एवं पूरा खरसिया ग्रामीण क्षेत्र का एक मात्र सुविधजनक अस्पताल है।  परंतु अदूरदर्शिता के कारण आज अस्पताल की स्थिति बंदप्राय हो गई हैं  जिसकी चिंता समय रहते नहीं की गई तो स्थिति भयावह एवं विस्फोटक हो सकती है।

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